दुनिया के व्यापारिक मोर्चे पर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने भारत समेत कई देशों के खिलाफ कथित तौर पर गलत व्यापारिक गतिविधियों को लेकर जांच शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए पुराने टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके बाद अब ट्रंप प्रशासन नए विकल्पों के जरिए अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के मुताबिक यह जांच दो अलग-अलग पहलुओं पर केंद्रित होगी। पहली जांच अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता यानी जरूरत से ज्यादा उत्पादन और उससे वैश्विक बाजार पर पड़ने वाले असर को लेकर होगी। वहीं दूसरी जांच जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात से जुड़ी होगी। अमेरिका का कहना है कि वह अपने देश की नौकरियों और उद्योगों की सुरक्षा के लिए किसी भी सख्त कदम से पीछे नहीं हटेगा।

इस जांच के दायरे में भारत के अलावा यूरोपीय संघ, चीन, जापान सहित कई बड़े व्यापारिक साझेदार देश शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस जांच के बाद अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाता है, तो इससे वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है और कई देशों के साथ अमेरिका के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों की जांच का असर करीब साठ देशों तक पहुंच सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संभावित दंड या टैरिफ सभी देशों पर समान रूप से लगाए जाएंगे या अलग-अलग।

गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अप्रैल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में एक अहम बैठक प्रस्तावित है। ऐसे में इस जांच को वैश्विक व्यापार और कूटनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।