महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के अंदरूनी मतभेदों को लेकर सियासत तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया है कि आदित्य ठाकरे गुट अब संजय राउत को किनारे करने की रणनीति बना रहा है और पार्टी के अंदर ‘आदित्य बनाम राउत’ का टकराव खुलकर सामने आ गया है।
बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नवनाथ बन ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के समय संजय राउत ने शरद पवार का नाम आगे कर आदित्य ठाकरे और उनके गुट को राजनीतिक तौर पर कमजोर करने की कोशिश की थी। अब विधायक सुनील प्रभु द्वारा विधानसभा में पत्राचाल घोटाले का मुद्दा उठाने से राउत खुद ही सवालों के घेरे में आ गए हैं। बन ने कहा कि इस मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाकर आदित्य ठाकरे गुट ने राउत को राजनीतिक तौर पर घेरने का काम किया है।

भाजपा प्रवक्ता ने पत्राचाल घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले की तुरंत जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले के कारण करीब 350 मराठी परिवार बेघर हो गए और इसके लिए संजय राउत जिम्मेदार हैं।
नवनाथ बन ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे गुट में अब आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच ‘सामना’ शुरू हो गया है और दोनों गुटों की खींचतान अब खुलकर सामने आ रही है।

केंद्र सरकार पर की जा रही आलोचनाओं को लेकर भी उन्होंने राउत पर निशाना साधा। बन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ईरान-इज़राइल युद्ध से पैदा हुए ईंधन और गैस संकट का मजबूती से सामना कर रहा है और केंद्र सरकार लगातार आपूर्ति को सामान्य रखने की कोशिश कर रही है। इसके बावजूद संजय राउत द्वारा प्रधानमंत्री पर की जा रही आलोचना गैर-जिम्मेदाराना और राजनीतिक है।
भाजपा प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि राउत को बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करने के बजाय पहले उद्धव ठाकरे और उनके गुट की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ जाने के बाद उद्धव ठाकरे की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है और महाराष्ट्र की जनता यह देख चुकी है।
नवनाथ बन ने यह भी कहा कि अगर राउत को संपादकीय लिखना ही है तो उन्हें “उद्धव ठाकरे का करुण अंत” और उद्धव गुट की वर्तमान स्थिति पर लिखना चाहिए, क्योंकि आज उनकी राजनीतिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है।