मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध का असर अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। सोमवार, 16 मार्च को ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 100 डॉलर के ऊपर ट्रेड कर रहा है। बताया जा रहा है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई पर संकट गहरा गया है, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल के दामों पर भी दिखने लगा है। सोमवार को गुजरात, उत्तराखंड, गोवा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों में फिलहाल कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

अगर देश के प्रमुख मेट्रो शहरों की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल 94 रुपये 77 पैसे प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल 103 रुपये 54 पैसे और डीजल 90 रुपये 03 पैसे प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 105 रुपये 45 पैसे और डीजल 92 रुपये 02 पैसे प्रति लीटर है। वहीं चेन्नई में पेट्रोल मामूली 4 पैसे सस्ता होकर 100 रुपये 80 पैसे प्रति लीटर पर पहुंच गया है, जबकि डीजल 92 रुपये 39 पैसे प्रति लीटर है।
बताया जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की चेतावनी दी है, जहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। इसके अलावा ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप पर संभावित हमलों की आशंका ने भी बाजार में घबराहट बढ़ा दी है।

इसी बीच बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने राहत का कदम उठाया है। एजेंसी ने अपने सुरक्षित भंडार से करीब 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने का फैसला किया है, ताकि वैश्विक सप्लाई को स्थिर किया जा सके और कीमतों पर लगाम लगाई जा सके। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।