वाराणसी से बड़ी खबर है, जहां यूजीसी रेगुलेशन 2026 के विरोध में सोमवार को जबरदस्त जनआक्रोश देखने को मिला। केसरिया भारत संगठन के बैनर तले कचहरी क्षेत्र में छात्र-युवाओं, किसानों और अधिवक्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और जन आक्रोश मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारी वरुणापुल स्थित शास्त्री घाट पर एकत्र हुए, जहां से राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानन्द पाण्डेय के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला गया। इस दौरान यूजीसी 2026 के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और केंद्र सरकार से इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग उठाई गई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इससे पहले भी 27, 28 और 29 जनवरी को विरोध और धरना प्रदर्शन किया जा चुका है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

राष्ट्रीय संयोजक कृष्णानन्द पाण्डेय ने यूजीसी 2026 को छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए इसे “काला कानून” करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक यह कानून पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस प्रदर्शन में अधिवक्ताओं की भी बड़ी भागीदारी रही, जिन्होंने नए नियमों का विरोध करते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। वहीं, संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गौरीश सिंह और गौरव मिश्र ने भी अपील की कि कानून वापसी तक संघर्ष जारी रखा जाए।
जन आक्रोश मार्च में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिससे काशी में इस मुद्दे को लेकर बढ़ते विरोध का साफ संकेत मिला है।