खाड़ी देशों में जारी तनाव और सप्लाई चेन पर पड़े असर का असर अब उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में भी देखने को मिल रहा है। रसोई गैस की भारी किल्लत के कारण जिले में हाहाकार मचा हुआ है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं, लेकिन कई लोगों को 3 से 4 दिन इंतजार के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।

गैस की कमी के चलते लोग अब एक बार फिर पारंपरिक चूल्हे की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। बाराबंकी के सतरीख क्षेत्र के शरीफाबाद गांव में गोबर के उपलों की मांग अचानक बढ़ गई है। यहां एक उपला करीब 10 रुपये में बिक रहा है। खास बात यह है कि कई जगहों पर उपलों की बिक्री डिजिटल तरीके से भी हो रही है, जहां लोग बारकोड स्कैन कर भुगतान कर रहे हैं।

गैस संकट का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल और रेस्तरां व्यवसाय भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जिले के कई छोटे-बड़े होटल और रेस्तरां गैस की कमी के कारण बंद हो गए हैं, जिससे कई परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
शहरों में रहने वाले लोग भी अब बाइक और कारों से गांवों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां वे महंगे दामों पर उपले खरीदकर अपने घरों में चूल्हे जलाने को मजबूर हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई चेन में आई बाधाओं का सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। बाराबंकी में रसोई गैस की किल्लत ने लोगों को आधुनिक रसोई से फिर पारंपरिक चूल्हे के दौर में लौटने पर मजबूर कर दिया है।