ठाणे से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है, जहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता आनंद परांजपे ने विकास लवांडे पर जोरदार हमला बोला है। परांजपे ने तीखे शब्दों में कहा कि “गांडुळासारखी वळवळ बंद करा”, यानी बेवजह आरोप लगाना बंद करें।
परांजपे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि भोंदू बाबा कैप्टन अशोक खरात मामले में महायुति सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है और गृह मंत्री के तौर पर खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि इस मामले में जो भी व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि रूपाली चाकणकर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे यह साफ होता है कि पार्टी निष्पक्ष जांच चाहती है। परांजपे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि “खुद का छुपाना और दूसरों पर उंगली उठाना” शरद पवार गुट की पुरानी आदत है।
विकास लवांडे के आरोपों पर पलटवार करते हुए परांजपे ने सवाल उठाया कि क्या ये बयान युवा नेता रोहित पवार के इशारे पर दिए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि जब जलसंपदा मंत्रालय विपक्ष के पास था, तब किन आदेशों के तहत ट्रस्ट को पानी दिया गया और उस समय मंत्री और मुख्यमंत्री कौन थे।
परांजपे ने जयंत पाटील पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके कई फोटो और वीडियो अशोक खरात के साथ सामने आए हैं, इसलिए अगर निष्पक्षता की बात है तो उन्हें भी सह-आरोपी बनाने की मांग की जानी चाहिए।
आगे उन्होंने पार्टी नेतृत्व को लेकर भी विपक्ष को घेरा और कहा कि उनके यहां फैसले स्पष्ट रूप से लिए जाते हैं, जबकि विपक्षी दल में नेतृत्व को लेकर भ्रम की स्थिति है—क्या पार्टी शरद पवार चला रहे हैं, या सुप्रिया सुळे, या फिर प्रदेश स्तर पर कोई और?
परांजपे ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं से अपील की कि यदि उनके पास अशोक खरात मामले से जुड़े कोई भी सबूत हैं, तो वे SIT को सौंपें। उन्होंने कहा कि SIT हर जानकारी की निष्पक्ष जांच करेगी और सिर्फ बयानबाजी करने से बचना चाहिए।
इस पूरे बयान से साफ है कि अशोक खरात मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
