मुंबई: सेंट्रल रेलवे ने बिना टिकट और अनधिकृत यात्रा करने वालों के खिलाफ अपना अभियान और तेज कर दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 (अप्रैल 2025 से फरवरी 2026) के दौरान रेलवे ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए करीब 37.99 लाख यात्रियों को पकड़ा, जो बिना टिकट या गलत/अवैध यात्रा प्राधिकरण के साथ सफर कर रहे थे।
रेलवे के अनुसार, इन मामलों में कुल 227.03 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 185.62 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। वहीं यात्रियों की संख्या में भी करीब 10 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है।
फरवरी 2026 के आंकड़े भी इस सख्ती को दर्शाते हैं। इस महीने में ही 3.65 लाख यात्रियों को पकड़ा गया, जबकि फरवरी 2025 में यह संख्या 3.32 लाख थी। जुर्माने की राशि भी बढ़कर 23.27 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले साल फरवरी के 18 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 30 प्रतिशत अधिक है।

डिवीजनवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मुंबई डिवीजन से 71.32 करोड़ रुपये, भुसावल से 75.29 करोड़ रुपये, पुणे से 27.14 करोड़ रुपये, नागपुर से 24.93 करोड़ रुपये और सोलापुर से 10.53 करोड़ रुपये की वसूली की गई। इसके अलावा मुख्यालय स्तर पर 17.82 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया।
सेंट्रल रेलवे ने बताया कि टिकट जांच के लिए मल्टी-प्रोंग्ड रणनीति अपनाई गई है, जिसमें स्टेशन चेक, एम्बुश चेक, फोर्ट्रेस चेक, इंटेंसिव चेक और मेगा ड्राइव शामिल हैं। ये अभियान मेल/एक्सप्रेस, स्पेशल ट्रेनों के साथ-साथ मुंबई और पुणे के उपनगरीय नेटवर्क में भी चलाए जा रहे हैं।
रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध टिकट के साथ ही यात्रा करें। टिकट रेलवे के अधिकृत काउंटर, एटीवीएम मशीन या IRCTC वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए खरीदे जा सकते हैं। साथ ही, फर्जी टिकट का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
रेलवे के अनुसार, फर्जी टिकट बनाना या उसका उपयोग करना भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माने के साथ-साथ 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि टिकटलेस यात्रा के प्रति उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जारी रहेगी और यात्रियों की सुरक्षित व सम्मानजनक यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।
