महाराष्ट्र में कौशल विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार ने आईटीआई संस्थानों के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार मंत्री Mangal Prabhat Lodha ने सार्वजनिक और सरकारी भागीदारी के माध्यम से स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का ऑनलाइन उद्घाटन किया।
छत्रपति संभाजीनगर स्थित देवगिरी शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में देश की अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनी Toyota के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है। इस केंद्र के साथ ही छत्रपति संभाजीनगर और नागपुर विभाग की कुल 17 आईटीआई संस्थाओं में तैयार की गई 17 आधुनिक प्रयोगशालाओं का भी एक साथ उद्घाटन किया गया।
इन प्रयोगशालाओं की स्थापना टोयोटा कंपनी द्वारा अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर फंड के तहत की गई है। छत्रपति संभाजीनगर विभाग की 14 और नागपुर विभाग की 3 आईटीआई में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ स्थापित करने के लिए करीब 5 करोड़ 44 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

इस अवसर पर मंत्री लोढ़ा ने कहा कि राज्य की आईटीआई संस्थाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित कर उन्हें आदर्श प्रशिक्षण केंद्रों में बदला जा रहा है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण मिल सके और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त हों।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत विद्यार्थियों को औद्योगिक प्रबंधन, आधुनिक कौशल, औद्योगिक सुरक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और कार्य संस्कृति से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक व्हीकल और सौर ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में भी विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
इस कार्यक्रम के तहत TNS India Foundation के सहयोग से इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर टेक्निशियन कार्यशाला की भी शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से छात्रों को ग्रीन स्किल्स, सॉफ्ट स्किल्स और उद्योगों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त करने में आसानी होगी।

मंत्री लोढ़ा ने बताया कि यह पहल आईटीआई आधुनिकीकरण की पहली कड़ी है। इसके अगले चरण में वर्ष 2026 से 2028 के बीच अमरावती, नागपुर और नाशिक क्षेत्र की 18 आईटीआई संस्थाओं का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जबकि 2029 से 2030 के बीच मुंबई और पुणे क्षेत्र की 14 आईटीआई को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक सार्वजनिक और सरकारी भागीदारी के माध्यम से कुल 32 आईटीआई संस्थाओं को आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों में बदला जाए। पहले चरण में ही करीब 15 हजार विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि कौशल विकास को बढ़ावा देने से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।