बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी ने साल 2026 के श्रीगणेशोत्सव और नवरात्रोत्सव को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है।
बीएमसी ने साफ किया है कि पर्यावरणपूरक गणेश मूर्तियों को बढ़ावा देने के लिए मूर्तिकारों को अब अस्थायी मंडप लगाने की अनुमति पूरी तरह नि:शुल्क दी जाएगी। इतना ही नहीं, ‘पहले आवेदन, पहले प्राथमिकता’ के आधार पर केवल उन्हीं मूर्तिकारों को जगह दी जाएगी जो इको-फ्रेंडली मूर्तियां बनाएंगे।
बीएमसी की ओर से मूर्तिकारों को शाडू मिट्टी भी मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी, साथ ही पर्यावरण विभाग की तरफ से प्राकृतिक रंग भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

परमिशन की पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘वन विंडो सिस्टम’ लागू किया गया है, जो 27 मार्च 2026 से बीएमसी की वेबसाइट पर शुरू हो चुका है। मूर्तिकार 10 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, जबकि परमिशन की अंतिम तारीख 20 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
बीएमसी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मंडप का उपयोग केवल मूर्ति निर्माण के लिए ही होगा। यहां पीओपी यानी प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बनाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और इसके लिए मूर्तिकारों को स्वयंघोषणा पत्र भी देना होगा।
साथ ही मंडप बनाने के दौरान सड़कों या फुटपाथ पर गड्ढे खोदने पर रोक लगाई गई है। नियम तोड़ने पर प्रति गड्ढा 2000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
यह पूरा अभियान बीएमसी आयुक्त भूषण गगराणी के निर्देश और अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अविनाश ढाकणे के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।
बीएमसी का उद्देश्य साफ है मुंबई में इस बार गणेशोत्सव को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाना और प्रदूषण को कम करना है।
