मुंबई :मुंबई कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव सचिन सावंत ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि बीजेपी विकास के मुद्दों पर बात करने में पूरी तरह विफल हो चुकी है, इसलिए वह बार-बार हिंदू- मुस्लिम का मुद्दा उछालकर समाज को बांटने का काम कर रही है।
सचिन सावंत ने मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम द्वारा मुंबई में मुस्लिम आबादी बढ़ने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह बयान बिना किसी अध्ययन और शोध के दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में अब तक जनगणना ही नहीं हुई, तो अमित साटम ये आंकड़े कहां से लेकर आए।
सचिन सावंत ने कहा कि बीजेपी नेताओं को भगवान राम के नाम का जाप करने के बजाय हर समय सिर्फ “मुसलमान” शब्द ही दिखाई देता है। बीजेपी और उसके नेता नींद और सपनों में भी मुसलमानों को ही देखते हैं। यह मानसिकता दर्शाती है कि बीजेपी के पास विकास पर कहने के लिए कुछ भी नहीं बचा है।
उन्होंने “वोट जिहाद” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लोकतंत्र और मतदाताओं का अपमान बताया।

सावंत ने कहा कि अगर बीजेपी यह दावा कर रही है कि देश में बांग्लादेशी घुसपैठिए बढ़े हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आती है। इसका सीधा मतलब यही है कि गृह मंत्रालय विफल और अक्षम साबित हो रहा है।
सचिन सावंत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर अमित साटम अपने ही नेतृत्व पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, तो अमित शाह को उन्हें तुरंत पद से हटाना चाहिए। उन्होंने बीजेपी को “बिना अध्ययन बोलने वाली मूर्ख पार्टी” करार दिया।
इसके साथ ही सचिन सावंत ने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी को असली पीड़ा उज्ज्वल निकम की करारी हार से हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मनुवादी सोच वाली बीजेपी इस बात से परेशान है कि वर्षा एकनाथ गायकवाड़ जैसी बौद्ध महिला सांसद बनकर संसद पहुंची हैं। वर्षों तक जिन वर्गों और महिलाओं को नेतृत्व से दूर रखा गया, आज संविधान ने उन्हें नेतृत्व का अधिकार दिया है और यही बात मनुवादियों को खटक रही है।
सचिन सावंत ने कहा कि बीजेपी जानबूझकर धर्म, जाति, भाषा और प्रांत के नाम पर विवाद खड़े कर रही है ताकि जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, बुनियादी सुविधाओं और विकास जैसे असली मुद्दों से भटकाया जा सके।
आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनावों को लेकर उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी केवल आम नागरिकों के बुनियादी मुद्दों पर ही चुनाव लड़ेगी। “नो विवाद, ओनली विकास” के नारे के साथ कांग्रेस मुंबईकरों के साथ खड़ी है और जनता बीजेपी की धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति में फंसने वाली नहीं है।