इस्कॉन के गोवर्धन इकोविलेज (GEV), पालघर ने अपनी ‘मेरी माटी मेरी थाली’ कैंपेन के तहत ‘नेटिव फ़ूड मैटर्स’ पहल के अंतर्गत 30 दिसंबर को नेटिव फ़ूड डे का आयोजन किया। इस अवसर पर ‘पालघर थाली’ का अनावरण किया गया, जो क्षेत्र की जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक भोजन ज्ञान पर आधारित एक विशेष भोजन अनुभव है।

कार्यक्रम में गोवर्धन इकोविलेज के संस्थापक एचएच राधानाथ स्वामी की उपस्थिति रही। इस पहल के समर्थन में वैश्विक लेखक, वक्ता और पर्पस कोच जय शेट्टी अपनी पत्नी राधी देवलोकिया शेट्टी के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। राधी देवलोकिया शेट्टी एक जानी-मानी प्लांट-बेस्ड पाक विशेषज्ञ और वेलनेस एडवोकेट हैं।
माइंडफुलनेस और वेलबीइंग पर वैश्विक स्तर पर अपने कार्य, पुस्तकों, पॉडकास्ट और अरबों व्यूज़ वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए पहचाने जाने वाले जय शेट्टी लंबे समय से सचेत और सतत जीवनशैली के समर्थक रहे हैं। वहीं राधी शेट्टी ने अपने पाक और वेलनेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राकृतिक, पारंपरिक और समग्र भोजन पद्धतियों को लगातार बढ़ावा दिया है, जो ‘नेटिव फ़ूड मैटर्स’ के विज़न से मेल खाता है।
गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक और नेटिव फ़ूड मैटर्स पहल के रणनीतिक प्रमुख गौरांग दास ने कहा कि जय शेट्टी और राधी शेट्टी अपने परोपकारी योगदान के माध्यम से इस पहल का उदारतापूर्वक समर्थन कर रहे हैं, जिससे भारत की मूल भोजन विरासत से दोबारा जुड़ने की आवश्यकता और प्रासंगिकता को बल मिला है।
सह्याद्री की तलहटी में स्थित गोवर्धन इकोविलेज पारिस्थितिक जीवन के एक मान्यता प्राप्त मॉडल के रूप में उभरा है। यहां सौर ऊर्जा आधारित बुनियादी ढांचा, वर्षा जल संचयन प्रणालियां, बायोगैस इकाइयां और एक दुर्लभ बीज बैंक मौजूद है। ‘नेटिव फ़ूड मैटर्स’ पहल के जरिए GEV पारंपरिक भारतीय भोजन ज्ञान को पुनर्जीवित करने और एक ऐसी खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है, जो स्वास्थ्यवर्धक, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार हो।
वैश्विक खाद्य प्रणालियों पर बढ़ते दबाव के बीच यह पहल विशेष महत्व रखती है। औद्योगिक खाद्य प्रथाओं ने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर किया है और स्वदेशी खाद्य संस्कृतियों को हाशिये पर पहुंचाया है। FAO 2023 के अनुसार, विश्व स्तर पर 733 मिलियन लोग भूख का सामना कर रहे हैं, जबकि कृषि क्षेत्र वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 26 प्रतिशत का योगदान देता है। ऐसे में स्वदेशी भोजन ज्ञान को लचीली, पौधे-आधारित और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के लिए अहम माना जा रहा है।

इन चुनौतियों के समाधान के लिए गोवर्धन इकोविलेज, प्रोफेसर रंजन कुमार घोष के नेतृत्व में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद और प्रोफेसर अतुल गोखले के नेतृत्व में सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशनल साइंसेज जैसे नॉलेज पार्टनर्स के साथ मिलकर एक समग्र मॉडल विकसित कर रहा है, जिसमें पाक विरासत, सामुदायिक भागीदारी और नीति स्तर की सोच को जोड़ा गया है।
गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरांग दास ने कहा, “भोजन सिर्फ पोषण नहीं है। यह पहचान, पारिस्थितिकी, समानता और चेतना का प्रतिनिधित्व करता है। नेटिव फ़ूड मैटर्स का उद्देश्य इस समग्र समझ को सार्वजनिक जीवन में व्यवहारिक रूप देना है।”
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘पालघर थाली’ रही, जिसे लगभग एक साल के शोध के बाद विकसित किया गया है। इसमें स्वदेशी सामग्री, पारंपरिक पकाने की विधियां और क्षेत्र के मौसमी भोजन पैटर्न को शामिल किया गया है। जय और राधी शेट्टी समेत अन्य अतिथियों ने सबसे पहले इस थाली का अनुभव किया।
‘पालघर थाली’ बड़े ‘मेरी माटी मेरी थाली’ आंदोलन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों में स्थानीय फसलों और व्यंजनों के माध्यम से भारत की क्षेत्रीय खाद्य विविधता को सामने लाना है। पालघर पायलट के तहत पोषण उत्सव, सामुदायिक आउटरीच और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं, जिनमें विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की महिलाओं और बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
इस अवसर पर ‘पालघर कॉफी टेबल बुक’ का भी विमोचन किया गया, जिसमें जिले की पाक विरासत, पारंपरिक सामग्री और व्यंजनों का दस्तावेजीकरण किया गया है। गोवर्धन इकोविलेज आने वाले आगंतुक हर सप्ताहांत गोविंदा रेस्टोरेंट में ‘मदन मोहन थाली’ के माध्यम से क्षेत्रीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं।
एक वर्ष से अधिक समय से सक्रिय ‘नेटिव फ़ूड मैटर्स’ पहल अब देशभर में अपने शोध, वकालत और कार्यान्वयन प्रयासों का विस्तार करने की तैयारी में है। इसका दीर्घकालिक लक्ष्य सचेत भोजन को भारत में एक मुख्यधारा और आकांक्षी जीवनशैली के रूप में स्थापित करना है।