दुबई :यमन में चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। यूएई समर्थित अलगाववादी नेता और सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के प्रमुख ऐदारूस अल-जुबैदी के देश छोड़कर फरार होने की खबरों ने इस टकराव को और गहरा कर दिया है।
हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाली प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने अल-जुबैदी को देशद्रोह के आरोप में परिषद से निष्कासित कर दिया है। परिषद का आरोप है कि सऊदी अरब में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने से इनकार करने के बाद अल-जुबैदी ने सशस्त्र बलों को संगठित करना शुरू कर दिया था, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ।

इसी बीच सऊदी अरब ने यमन में 15 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य अलगाववादी ताकतों की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था। गठबंधन के प्रवक्ता के अनुसार, अल-जुबैदी को सऊदी अरब के लिए उड़ान भरनी थी, लेकिन वह अंतिम समय में विमान में सवार नहीं हुआ और किसी अज्ञात स्थान पर भाग गया।
हूती विरोधी ताकतों के नियंत्रण वाली ‘सबा’ समाचार एजेंसी के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम सऊदी समर्थित बलों और यूएई समर्थित एसटीसी के बीच बढ़ते टकराव का नतीजा है। हाल के हफ्तों में सऊदी अरब ने एसटीसी के ठिकानों पर बमबारी की है और कथित तौर पर यूएई से आने वाली हथियारों की खेप को भी निशाना बनाया गया है।
यमन संकट ने एक बार फिर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को उजागर कर दिया है। हालांकि दोनों देश ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन यमन के भीतर प्रभाव और नियंत्रण को लेकर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। मौजूदा हालात में सऊदी अरब की रणनीतिक बढ़त साफ दिखाई दे रही है, जबकि यूएई समर्थित ताकतें कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं।