भारत द्वारा अमेरिका के कई कृषि उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ अब वाशिंगटन में सियासी मुद्दा बनते जा रहे हैं। खासतौर पर दालों पर लगाए गए ऊंचे आयात शुल्क से अमेरिकी किसान और उत्पादक बुरी तरह प्रभावित हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अमेरिकी कानून निर्माता खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर बातचीत करने की अपील कर रहे हैं।
न्यूयॉर्क और वाशिंगटन से सामने आई जानकारी के मुताबिक, मोंटाना के रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के सीनेटर केविन क्रेमर ने राष्ट्रपति ट्रंप को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने भारत पर आरोप लगाया है कि उसने अमेरिकी दालों पर “अनुचित और भारी टैरिफ” लगा रखे हैं, जिससे अमेरिकी उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा प्रतिस्पर्धी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में कहा है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता देश है और वैश्विक खपत में उसका हिस्सा करीब 27 प्रतिशत है। वहीं मोंटाना और नॉर्थ डकोटा जैसे अमेरिकी राज्य मटर और अन्य दलहनी फसलों के शीर्ष उत्पादक हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार तक पहुंच बनाने में अमेरिकी किसानों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत में सबसे ज्यादा खपत होने वाली दालों जैसे मसूर, चना, सूखी फलियां और मटर पर अमेरिका से होने वाले निर्यात पर ऊंचे आयात शुल्क लगाए गए हैं। सांसदों के अनुसार, भारत ने 30 अक्टूबर को पीले मटर पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 1 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गया। इस फैसले ने अमेरिकी दाल उत्पादकों की चिंता और बढ़ा दी है।

अमेरिकी कानून निर्माताओं का कहना है कि इन टैरिफ के चलते अमेरिकी किसानों के लिए भारत में अपनी उच्च गुणवत्ता वाली दालों का निर्यात करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह किया है कि भारत के साथ होने वाली किसी भी भविष्य की व्यापार वार्ता में दाल फसलों पर टैरिफ कम कराने को प्राथमिक मुद्दा बनाया जाए।
सांसद डेन्स और क्रेमर ने ट्रंप से कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बातचीत कर दालों पर लगे भारी शुल्क को कम करने का अनुरोध करें, ताकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूती मिल सके। उनका मानना है कि टैरिफ में कमी से अमेरिकी उत्पादकों और भारतीय उपभोक्ताओं—दोनों को लाभ होगा।

पत्र में यह भी याद दिलाया गया है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान, वर्ष 2020 में भारत के साथ व्यापार वार्ताओं से पहले भी यह मुद्दा उठाया गया था। उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सांसदों का पत्र खुद प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा था, जिससे अमेरिकी दाल उत्पादकों को बातचीत की मेज तक अपनी बात पहुंचाने में मदद मिली थी।
अब एक बार फिर अमेरिकी सांसदों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे को गंभीरता से उठाएंगे और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में दालों पर टैरिफ को लेकर कोई सकारात्मक समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।