महाराष्ट्र में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को गंभीर संकट में डाल दिया है। मुंबई में गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण करीब 30 फीसदी होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं। वहीं ठाणे, वसई-विरार और पालघर क्षेत्रों में भी होटल व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के सचिव प्रदीप शेट्टी के मुताबिक गैस की कमी के कारण कई होटल मालिकों को अपने संचालन का समय घटाना पड़ा है। सीमित गैस उपलब्ध होने की वजह से कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू में भी कटौती कर दी है। अगर जल्द ही नई आपूर्ति नहीं पहुंची तो छोटे और मध्यम वर्ग के और भी होटल बंद होने की आशंका है।
सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की औसत मासिक जरूरत के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन करने की घोषणा की है। हालांकि उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि असली चिंता इस बात की है कि यह अतिरिक्त गैस जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी उपलब्ध हो पाएगी। बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करने वाले होटल और रेस्टोरेंट्स के लिए यह मात्रा भी पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।
स्थिति को देखते हुए एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को अस्थायी उपाय अपनाने की सलाह दी है। इसमें गैस की बचत करना, ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजनों को मेन्यू से हटाना, जहां संभव हो वहां इंडक्शन चूल्हे और इलेक्ट्रिक ओवन का इस्तेमाल बढ़ाना और सिर्फ पीक आवर्स में होटल संचालन करना शामिल है।

वसई-विरार में भी गैस की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। यहां करीब 30 प्रतिशत होटल पहले ही बंद हो चुके हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट मंडराने लगा है। होटल एसोसिएशन के महासचिव विहंग महात्रे के अनुसार अगर जल्द गैस आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो अगले दो दिनों में लगभग 60 प्रतिशत होटल बंद होने की स्थिति बन सकती है।
पालघर जिला प्रशासन ने फिलहाल होटल व्यवसाय के लिए गैस आपूर्ति रोक दी है। इस मुद्दे पर होटल एसोसिएशन के पदाधिकारियों की कलेक्टर कार्यालय में बैठक भी हुई, लेकिन अधिकारियों ने साफ कर दिया कि मौजूदा स्थिति में होटलों को गैस उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन शेट्टी ने सरकार से मांग की है कि होटल उद्योग को भी जीवनावश्यक सेवाओं की श्रेणी में शामिल किया जाए और पूरी तरह आपूर्ति बंद करने के बजाय कम से कम 50 प्रतिशत गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं।
फिलहाल सिलेंडर की कमी से जूझ रहे कई होटल मालिक जुगाड़ के सहारे काम चला रहे हैं। जिनको गैस मिल जा रही है वे एक-दो दिन होटल चला पा रहे हैं, जबकि जिनको सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है उन्हें मजबूरन होटल बंद कर शटर डाउन करना पड़ रहा है।