इस विशेष पॉडकास्ट में ‘किन्नर जगतगुरु’ हेमांगी सखी ने वर्तमान धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को खुली चुनौती देते हुए पूछा कि जब किन्नर समाज का उत्पीड़न हो रहा था और धर्मांतरण की बातें हो रही थीं, तब ये धर्म के रक्षक कहाँ थे? हेमांगी सखी का तर्क है कि ‘मर्यादा’ का ज्ञान सिर्फ कुछ खास लोगों तक सीमित नहीं है; उन्होंने खुद वर्षों तक शास्त्रों का अध्ययन किया है और वृंदावन की गलियों में भक्ति सीखी है, इसलिए उन्हें किसी से मर्यादा सीखने की आवश्यकता नहीं है।

धार्मिक पदों की गरिमा पर बात करते हुए, हेमांगी सखी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि आज के समय में महामंडलेश्वर और जगतगुरु जैसे प्रतिष्ठित पद पैसों के दम पर बेचे जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनसे भी इन पदों के लिए करोड़ों और लाखों रुपयों की मांग की गई थी। उनका कहना है कि जहाँ आदि शंकराचार्य ने सनातन के विस्तार की बात की थी, वहीं आज के मठाधीश इसे केवल अपने वर्चस्व की लड़ाई बना चुके हैं और वे एयरकंडीशन मठों और लग्जरी कारों तक सीमित हो गए हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर धर्म का पतन हो रहा है।

हेमांगी सखी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें ‘कांग्रेसी शंकराचार्य’ करार दिया और उन पर लगे कानूनी आरोपों (जैसे पॉस्को एक्ट) की गंभीरता पर भी चर्चा की। उन्होंने ज्ञानवापी और मथुरा जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि अर्धनारीश्वर शिव के मंदिर में पूजा करना उनका अधिकार है और इसे कोई नहीं रोक सकता। अंत में, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी के कार्य में दखल नहीं देतीं, लेकिन यदि कोई किन्नर समाज के उत्थान में बाधा बनेगा, तो उनकी ‘किन्नर सेना’ सड़कों पर उतरकर तांडव करने से भी पीछे नहीं हटेगी।