बस्ती:परशुरामपुर थाने पर तैनात उपनिरीक्षक अजय गौड़ की मौत को लेकर बीते कई दिनों से चल रही अटकलों पर अब आधिकारिक विराम लग गया है। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि दरोगा अजय गौड़ की मौत सरयू नदी में डूबने से हुई थी और यह हत्या का मामला नहीं है।
5 फरवरी को अजय गौड़ के अचानक लापता होने के बाद मामला तूल पकड़ गया था। अमहट घाट पर उनकी मोटरसाइकिल मिलने से संदेह और गहरा गया। इसके तीन दिन बाद, 8 फरवरी को सरयू नदी से उनका शव बरामद किया गया। एक जिम्मेदार पुलिस अधिकारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी।

परिजनों ने शुरुआत में हत्या की आशंका जताई थी, जिसके बाद पुलिस ने मामले की गहन और बहुस्तरीय जांच शुरू की। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और फॉरेंसिक विश्लेषण सहित सभी पहलुओं की विस्तार से पड़ताल की गई।
जांच के दौरान एक बाइक चोर को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से मृतक का मोबाइल फोन बरामद हुआ। हालांकि पूछताछ और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उसका दरोगा की मौत से कोई सीधा संबंध नहीं है।
पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित रखकर जांच के लिए भेजा गया और विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय हेतु रिपोर्ट एम्स गोरखपुर भेजी गई। मेडिकल टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शव पर किसी भी प्रकार की बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए। परिस्थितिजन्य साक्ष्य और चिकित्सकीय विश्लेषण डूबने की ओर संकेत करते हैं। फेफड़ों में पानी न मिलने के सवाल पर विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कई दिनों तक पानी में रहने से शरीर में प्राकृतिक बदलाव हो सकते हैं, जिससे ऐसे निष्कर्ष प्रभावित हो सकते हैं।

घाट के आसपास मौजूद लोगों के बयान, तकनीकी साक्ष्य और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अजय गौड़ की मृत्यु दुर्घटनावश सरयू नदी में डूबने से हुई। बस्ती परिक्षेत्र के डीआईजी संजीव त्यागी ने बताया कि जांच के हर पहलू को गंभीरता से परखा गया और अंतिम रिपोर्ट में हत्या की आशंका को निराधार पाया गया है।
इस खुलासे के साथ ही लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है, हालांकि पुलिस विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मामले को संवेदनशील मानते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ जांच पूरी करने की बात दोहराई है।