मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अब तक इस जंग में तेल रिफाइनरी और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा था, लेकिन अब पानी के स्रोत भी हमलों के दायरे में आ गए हैं।
रविवार को बहरीन ने आरोप लगाया कि ईरान ने उसके वॉटर डीसेलिनेशन प्लांट पर ड्रोन हमला किया है। वहीं इससे एक दिन पहले ईरान ने भी दावा किया था कि उसके डीसेलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया, जिससे करीब 30 गांवों में पानी की सप्लाई बाधित हो गई। इन घटनाओं ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में पानी की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

दरअसल खाड़ी देशों में पीने के पानी की बड़ी जरूरत समुद्र के खारे पानी को साफ कर तैयार करने वाले डीसेलिनेशन प्लांट से पूरी होती है। रिपोर्ट के मुताबिक फारस की खाड़ी क्षेत्र में 400 से ज्यादा ऐसे प्लांट मौजूद हैं, जो न सिर्फ आम लोगों की प्यास बुझाते हैं बल्कि उद्योगों और शहरों की जल आपूर्ति भी सुनिश्चित करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन प्लांट्स को लगातार निशाना बनाया गया तो खाड़ी देशों में बड़ा जल संकट पैदा हो सकता है। दुनिया भर में वॉटर डीसेलिनेशन की कुल क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में है। संयुक्त अरब अमीरात में करीब 42 प्रतिशत, सऊदी अरब में लगभग 70 प्रतिशत, ओमान में 86 प्रतिशत और कुवैत में करीब 90 प्रतिशत पानी की जरूरत इन प्लांट्स से पूरी होती है।

ऐसे में अगर युद्ध के दौरान इन महत्वपूर्ण जल संयंत्रों पर हमले बढ़ते हैं तो बहरीन और कतर जैसे छोटे देशों के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों के पास सीमित जल भंडार है और डीसेलिनेशन प्लांट नष्ट होने की स्थिति में कुछ ही दिनों में हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।
यानी साफ है कि अगर मिडिल ईस्ट की जंग में पानी को हथियार बनाया गया तो इसका असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में मानवीय संकट पैदा हो सकता है।