
मिर्जापुर: विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषणों के रखरखाव और रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि दान में मिले आभूषणों का विस्तृत विवरण दर्ज नहीं किया जाता और उन्हें केवल “पीली धातु” तथा “सफेद धातु” के रूप में रजिस्टर में दर्ज किया जाता है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
श्री विंध्य पंडा समाज और विंध्य विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने दावा किया कि वर्ष 1982 से मंदिर की व्यवस्था विंध्य विकास परिषद के अधीन है, लेकिन अब तक आभूषणों के लिए व्यवस्थित स्टॉक रजिस्टर नहीं बनाया गया है। उनका कहना है कि दान में मिले गहनों की सार्वजनिक रूप से जांच, सूचीकरण और मूल्यांकन होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे।
राजन पाठक ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर में प्राप्त दान और उसके उपयोग का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया जाता। उन्होंने मांग की कि मंदिर में प्राप्त नकद दान और आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कर समय-समय पर सार्वजनिक किया जाए तथा मंदिर प्रशासन पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए।
नोट: ये आरोप श्री विंध्य पंडा समाज और विंध्य विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों पर मंदिर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं आई है।