
मुंबई: महाराष्ट्र में 121 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले पर निशाना साधते हुए सरकार से कई सवाल पूछे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इलाज के अभाव में तड़पकर जान गंवाने वाले लोगों के लिए 9 करोड़ रुपये तक उपलब्ध नहीं कराए गए, जबकि नवनीत राणा को 121 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दिए जाने की बात सामने आई है।
विपक्ष ने सवाल उठाया है कि यह रकम सरकारी खजाने से दी गई है, चंद्रशेखर बावनकुले की जेब से नहीं गई। ऐसे में आर्थिक मदद देने के फैसले में इतना बड़ा अंतर क्यों किया गया? विपक्ष ने सरकार से पूछा है कि जरूरतमंद लोगों के इलाज और सहायता के लिए राशि उपलब्ध कराने में आखिर ऐसी प्राथमिकता क्यों अपनाई गई।
इसके साथ ही हनुमानगढ़ी को 121 रुपये देने की बात स्वीकार किए जाने पर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि आखिर यह राशि देने का फैसला किस सांस्कृतिक या ऐतिहासिक प्रमाण के आधार पर किया गया था। इस फैसले के पीछे सरकार का क्या आधार था, इसे लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं।
121 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद और हनुमानगढ़ी को 121 रुपये देने के मुद्दे को लेकर अब महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्ष लगातार सरकार और बीजेपी नेताओं को घेर रहा है और आर्थिक मदद से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता की मांग कर रहा है। वहीं, इस पूरे मामले पर सरकार और बीजेपी की ओर से आने वाला जवाब भी अहम माना जा रहा है।