महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ में बड़ा बदलाव सामने आया है। e-KYC और पात्रता सत्यापन अभियान के बाद करीब 70 लाख महिला लाभार्थियों को अपात्र घोषित कर दिया गया है। अब इन महिलाओं को मई महीने की 1500 रुपये की आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक, योजना में बड़े पैमाने पर डुप्लीकेट आवेदन, आधार डिटेल में गड़बड़ी, गलत बैंक खातों की जानकारी और आय सीमा से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। सरकार ने साफ किया है कि केवल पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ जारी रहेगा।
राज्य मंत्री मेघना बोर्डीकर के अनुसार, e-KYC के लिए कई बार समय सीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन लाखों लाभार्थियों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। विधानसभा चुनावों से पहले शुरू की गई इस योजना में शुरुआती दौर में करीब 2.46 करोड़ महिलाएं शामिल थीं, लेकिन जांच के बाद लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.76 करोड़ रह गई है।
वहीं दूसरी ओर कई महिलाओं ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। लाभार्थियों का कहना है कि पोर्टल में तकनीकी दिक्कतें, बार-बार आने वाले एरर और स्थानीय स्तर पर सही जानकारी नहीं मिलने के कारण वे e-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकीं। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं का कहना है कि इस योजना की राशि उनके घर खर्च और बच्चों की पढ़ाई का बड़ा सहारा थी।
सरकार के इस फैसले से राज्य के बजट पर भी असर पड़ा है। 2026-27 के बजट में ‘लाडकी बहिण योजना’ के लिए आवंटन घटाकर 26,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल 36 हजार करोड़ रुपये था। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने लगी है।