मुंबई:महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आता नजर आ रहा है। ठाकरे गट के प्रमुख और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले दगडू सकपाळ के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। स्थानीय स्वराज्य संस्था चुनावों से ठीक पहले यह घटनाक्रम सिर्फ एक पार्टी बदलने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आने वाले चुनावी समीकरणों की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
दगडू सकपाळ के संभावित प्रवेश पर ठाकरे गट की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है। पार्टी के वरिष्ठ विधायक अजय चौधरी ने बेहद संयमित लेकिन राजनीतिक संकेतों से भरे शब्दों में कहा, “शुभेच्छा त्यांना, दिल्या घरी तू सुखी रहा।” उनका यह बयान साफ इशारा करता है कि ठाकरे गट इस घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहा है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर संयम बरतने की रणनीति अपनाई गई है।

अजय चौधरी ने यह भी स्वीकार किया कि हाल के दिनों में ठाकरे गट के कई पुराने सहयोगी शिंदे गट की ओर रुख कर रहे हैं। चुनाव नजदीक आते ही नेताओं की यह आवाजाही महाराष्ट्र की राजनीति में अस्थिरता और बदलते समीकरणों को उजागर कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दगडू सकपाळ से उनकी ग्लोबल अस्पताल में मुलाकात हुई थी, जिसके बाद इन अटकलों ने और जोर पकड़ लिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर दगडू सकपाळ वाकई शिंदे शिवसेना में शामिल होते हैं, तो इसका असर केवल एक सीट या एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ठाकरे गट की सांगठनिक ताकत को झटका लग सकता है, वहीं शिंदे गुट को चुनाव से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या दगडू सकपाळ का यह कदम आने वाले दिनों में और नेताओं के लिए रास्ता खोलेगा? क्या ठाकरे गट में टूट का सिलसिला जारी रहेगा? और क्या शिंदे शिवसेना चुनावी मैदान में और मजबूत होकर उभरेगी?
इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की नई तस्वीर पेश करेंगे।