देवभूमि उत्तराखंड में बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर सोमवार को कांग्रेस ने राजधानी में विशाल रैली निकालकर भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। प्रदेशभर से पहुंचे हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं ने लोकभवन घेराव कूच किया और सरकार पर जन मुद्दों की अनदेखी का आरोप लगाया।
रैली से पहले सभी नेता परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए, जहां प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मंच साझा किया। प्रदर्शन में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ. हरक सिंह रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने एक स्वर में राज्य सरकार को कानून व्यवस्था के मुद्दे पर घेरा।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश में महिला अपराध, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, जंगली जानवरों के हमले, पलायन, आपदा प्रभावितों को राहत और मुआवजा न मिलने जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार विफल साबित हुई है। किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा न मिलने और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया।
लोकभवन कूच से पहले लगाए गए पोस्टर और बैनर हटाए जाने पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। रैली को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने राजधानी में रूट डायवर्जन प्लान लागू किया।
प्रदेश युवा कांग्रेस प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव सुरभि द्विवेदी ने कहा कि एक समय देहरादून को देश का सुरक्षित शहर माना जाता था, लेकिन अब भय और अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने का प्रयास कर रहे हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है।

द्विवेदी ने सवाल उठाया कि यदि तथाकथित हिंदू रक्षक वास्तव में न्याय के पक्षधर हैं तो अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों में खुलकर आवाज क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा कि युवा कांग्रेस जनता की सुरक्षा और न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
कुल मिलाकर, कांग्रेस की इस रैली ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और जन मुद्दों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।