मुंबई:वंचित बहुजन आघाडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता प्रकाश आंबेडकर ने अग्निवीर योजना, देश की सामाजिक स्थिति और महाराष्ट्र की राजनीति को लेकर केंद्र सरकार और मीडिया पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अग्निवीर जवानों को पूरी तरह ‘इंडियन आर्मी एक्ट’ के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि सीमा पर शहीद होने वाले जवानों को पूरा सम्मान और मुआवजा मिल सके।
अग्निवीर योजना की संवैधानिक वैधता को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए आंबेडकर ने बताया कि इस मामले की सुनवाई फिलहाल टल गई है, लेकिन कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र को सेना में भर्ती का अधिकार ‘आर्मी एक्ट’ से ही मिलता है, ऐसे में जब अग्निवीरों को युद्धभूमि में भेजा जाता है, तो उन्हें उसी कानून के तहत सभी अधिकार और सुविधाएं मिलनी चाहिए।

देश की मौजूदा सामाजिक स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए आंबेडकर ने कहा कि जिस तरह से समाज में नफरत का माहौल बनाया जा रहा है, उससे देश में एक और गोधरा जैसी घटना की आशंका पैदा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया समाज में डर और विभाजन का माहौल बना रहा है और यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
महाराष्ट्र के महानगरपालिका चुनावों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मीडिया यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उभार से मुस्लिम समाज की राजनीतिक ताकत बढ़ गई है, जबकि वास्तविकता यह है कि पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य दलों के साथ रहने पर मुस्लिम प्रतिनिधियों की संख्या ज्यादा हुआ करती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया एक खास नैरेटिव बनाकर समाज में अविश्वास और टकराव पैदा कर रहा है।

इस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा और इतिहास को लेकर उनकी टिप्पणियों की आलोचना की। आंबेडकर ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान दोनों ने ब्रिटिशों के खिलाफ संघर्ष किया था और इतिहास को सही संदर्भ में समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े इतिहासकारों की किताबें भी पढ़ लें, तो उन्हें सही तथ्य समझ में आ जाएंगे।
आंबेडकर के इस बयान ने एक बार फिर अग्निवीर योजना, देश की सामाजिक स्थिति और राजनीतिक माहौल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। उनके बयान को केंद्र सरकार और राज्य सरकार की नीतियों पर सीधे सवाल के तौर पर देखा जा रहा है।