मुंबई:महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के नेवासा तालुका स्थित सौंदाळा गांव ने ग्रामसभा में जातमुक्ति का प्रस्ताव पारित कर एक नई सामाजिक पहल की शुरुआत की है। इस कदम की सराहना करते हुए हर्षवर्धन सपकाळ ने कहा कि भेदभाव और द्वेष के मौजूदा माहौल में सौंदाळा गांव ने एकता, समता और बंधुत्व का जो संदेश दिया है, वह पूरे राज्य में पहुंचना चाहिए।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने गांव का दौरा कर ग्रामवासियों को बधाई दी और संवाद किया। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, कांग्रेस पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। सपकाळ ने कहा कि आज देश और दुनिया में जानबूझकर भय और विभाजन का वातावरण बनाया जा रहा है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर भी डर और धमकियों की राजनीति देखी जा रही है, वहीं देश और राज्य में भी समाज को जाति और धर्म के आधार पर बांटने की कोशिशें हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि जाति ऐसी व्यवस्था है जो जन्म से जुड़ जाती है और आसानी से बदलती नहीं। आज भी बच्चों को स्कूल में प्रवेश के समय जाति लिखनी पड़ती है। समाज में जातिगत खाई और गहरी होती जा रही है। बीड जिले में संतोष देशमुख की हत्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से सामाजिक ताना-बाना कमजोर होता है और समाज में अविश्वास बढ़ता है।
सपकाळ ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सद्भावना पदयात्रा के माध्यम से सभी जाति और धर्म के लोगों को साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। ऐसे समय में सौंदाळा गांव का जातमुक्ति प्रस्ताव साहसिक और प्रेरणादायक कदम है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज राष्ट्रसंत गाडगे महाराज की जयंती है। गाडगे महाराज ने स्वच्छता, अंधविश्वास उन्मूलन, सामाजिक न्याय और मानवता का संदेश दिया था। सौंदाळा गांव का निर्णय उनके विचारों के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि गढ़ूले होते सामाजिक माहौल में इस गांव ने सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में “तुरटी” फेरने का काम किया है।

सौंदाळा गांव की इस पहल को सामाजिक समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो राज्यभर के लिए प्रेरणा बन सकता है।