उत्तराखंड की पवित्र हेमकुंड साहिब यात्रा विधिवत शुरू हो गई है। श्रद्धा, भक्ति और “जो बोले सो निहाल” के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं का पहला जत्था यात्रा के लिए रवाना हुआ। देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिला। ऋषिकेश और गोविंदघाट में भक्तों की बड़ी भीड़ उमड़ी रही।
हेमकुंड साहिब के कपाट 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। परंपरा के अनुसार पंच प्यारों की अगुवाई में पहला जत्था रवाना हुआ। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, स्वास्थ्य और भोजन की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
समुद्र तल से करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित Gurdwara Hemkund Sahib सिख धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। बर्फ से ढके पहाड़ों और पवित्र सरोवर के बीच स्थित यह गुरुद्वारा हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है।
यात्रा शुरू होने से पहले भारतीय सेना और सेवादारों ने भारी बर्फबारी के बावजूद रास्तों से बर्फ हटाने और ट्रैक को सुरक्षित बनाने का काम किया। प्रशासन ने पूरे यात्रा मार्ग पर पुलिस और राहत टीमों की तैनाती की है।
श्रद्धालु गोविंदघाट से पैदल यात्रा शुरू कर घांघरिया होते हुए हेमकुंड साहिब पहुंचेंगे। कठिन पहाड़ी रास्तों और ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही। कई श्रद्धालुओं ने इसे “आस्था और आत्मिक शांति की यात्रा” बताया।
मौसम विभाग ने यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम कभी भी बदल सकता है। प्रशासन ने मेडिकल कैंप, हेल्पलाइन और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा है।