
वॉशिंगटन/अंतरिक्ष जगत: अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के भविष्य को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। वर्ष 2030 के बाद ISS के संचालन, संभावित सेवानिवृत्ति और उसके स्थान पर नई पीढ़ी के अंतरिक्ष स्टेशनों की योजनाओं पर वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष एजेंसियों का ध्यान केंद्रित है।
करीब तीन दशकों से अंतरिक्ष अनुसंधान का प्रमुख केंद्र रहा International Space Station पृथ्वी की निचली कक्षा में वैज्ञानिक प्रयोगों, तकनीकी परीक्षणों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है। हालांकि स्टेशन की बढ़ती उम्र को देखते हुए इसके भविष्य को लेकर रणनीतिक योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 के बाद अंतरिक्ष अनुसंधान में सरकारी एजेंसियों के साथ निजी कंपनियों की भूमिका और बढ़ेगी। कई निजी कंपनियां नए वाणिज्यिक स्पेस स्टेशन विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं, जो भविष्य में ISS की भूमिका निभा सकते हैं।
वैज्ञानिकों का फोकस ऐसे आधुनिक अंतरिक्ष स्टेशनों पर है जो अनुसंधान, अंतरिक्ष पर्यटन, तकनीकी परीक्षण और चंद्रमा व मंगल मिशनों के लिए आधार केंद्र का काम कर सकें। इसके साथ ही अंतरिक्ष में दीर्घकालिक मानव उपस्थिति सुनिश्चित करने की योजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।
अंतरिक्ष विशेषज्ञों का मानना है कि ISS के बाद का दौर अंतरिक्ष विज्ञान और वाणिज्यिक अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकता है।