
नई दिल्ली:
भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। हैदराबाद स्थित निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ ने ‘मिशन आगमन’ के तहत सफलतापूर्वक उड़ान भरते हुए लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में अपनी निर्धारित पेलोड्स स्थापित कर दीं। यह भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का “निर्णायक क्षण” बताया। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी अंतरिक्ष विज्ञान में नए अवसरों और नवाचारों का मार्ग खोल रही है तथा यह उपलब्धि देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और नवाचार के लिए प्रेरित करेगी।
विक्रम-1 भारत का पहला निजी रूप से विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है। चार चरणों वाला यह रॉकेट कम लागत और तेज़ व्यावसायिक उपग्रह प्रक्षेपण सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। मिशन के दौरान रॉकेट ने कई पेलोड्स को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित किया।
इस सफलता को भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत वैश्विक कमर्शियल स्पेस लॉन्च मार्केट में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ा चुका है।