भारत के स्वाधीनता संग्राम की आत्मा माने जाने वाले ‘वंदे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्ष और 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हिमालय की गोद में स्थित केदारकंठा शिखर पर एक विशेष देशभक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तराखंड के इस दुर्गम पर्वत शिखर पर, करीब 12,500 फीट की ऊंचाई और माइनस 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच देशप्रेम का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
कठिन चढ़ाई, फिसलन भरे रास्ते, तेज़ बर्फीली हवाएं और जान जमा देने वाली ठंड के बावजूद देश के अलग–अलग राज्यों से आए ट्रेकर्स ने अदम्य साहस और अनुशासन का परिचय देते हुए केदारकंठा शिखर को सफलतापूर्वक फतह किया। शिखर पर पहुंचते ही जब ‘वंदे मातरम्’ का जयघोष गूंजा, तो वह क्षण केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और एकता का जीवंत प्रतीक बन गया।

इस अभियान के दौरान Flag Code of India के सभी नियमों का पूरी तरह पालन किया गया। कुल 76 भारतीय राष्ट्रीय ध्वजों को पूरे सम्मान, मर्यादा और शिस्त के साथ प्रदर्शित किया गया, जिससे तिरंगे की गरिमा और गौरव पूरी तरह बनाए रखा गया।
इस ऐतिहासिक अभियान में देशभर से कुल 12 ट्रेकर्स शामिल हुए, जिनमें जयपुर से 5, सूरत से 1, असम से 1 और महाराष्ट्र से 5 पर्वतारोहियों ने भाग लिया। मुंबई के अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही और अनुभवी गाइड वैभव ऐवळे के नेतृत्व में यह अभियान सुरक्षित और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ।
अभियान की सबसे प्रेरणादायक तस्वीर महज़ 11 वर्षीय हृदया चव्हाण की रही, जिन्होंने कठोर मौसम और माइनस तापमान के बावजूद केदारकंठा शिखर पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इतनी कम उम्र में दिखाया गया उनका साहस और आत्मविश्वास न केवल उपस्थित लोगों के लिए, बल्कि देश की आने वाली पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना।

केदारकंठा की बर्फीली चोटियों पर गूंजता ‘वंदे मातरम्’ यह संदेश देता नजर आया कि देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र के प्रति समर्पण दिखाने का नाम है। यह अभियान राष्ट्रप्रेम, एकता और भारतीय मूल्यों की वह अमिट छाप छोड़ गया, जो लंबे समय तक याद की जाएगी।