महाराष्ट्र के चंद्रपुर महानगरपालिका के मेयर चुनाव में सियासी गणित आखिरी वक्त पर बदल गया और बीजेपी ने बाजी मार ली। बीजेपी की उम्मीदवार संगीता खांडेकर 32 वोट हासिल कर मेयर चुनी गईं, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 31 वोट मिले। महज एक वोट के अंतर से हुई इस हार ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है।
चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस 66 सदस्यीय नगर निगम में 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बावजूद वह मेयर पद पर कब्जा नहीं जमा सकी। बीजेपी, जिसके पास 23 सीटें थीं, ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के पार्षदों का समर्थन हासिल कर जीत का समीकरण बना लिया।

चुनाव परिणाम के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्षदों की खरीद-फरोख्त हुई है। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम के समर्थन से बीजेपी को बढ़त मिली, जबकि प्रकाश अंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन अघाड़ी मतदान के दौरान अनुपस्थित रही। सपकाल का दावा है कि यदि वंचित बहुजन अघाड़ी कांग्रेस के साथ खड़ी होती, तो नतीजा अलग होता।
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी के पार्षद एकजुट थे और अंदरूनी मतभेद सुलझा लिए गए थे। सपकाल ने कहा कि बीजेपी सिर्फ शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और अन्य दलों के समर्थन के कारण ही अपना मेयर बना सकी।
इस चुनाव में शिवसेना (यूबीटी) के पार्षद प्रशांत दानव डिप्टी मेयर चुने गए हैं।
गौरतलब है कि 66 सदस्यीय चंद्रपुर महानगरपालिका में कांग्रेस के पास 27, बीजेपी के पास 23, शिवसेना (यूबीटी) के 6, भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष (जनविकास सेना) के 3, वंचित बहुजन अघाड़ी के 2 और एआईएमआईएम, बीएसपी व शिवसेना के एक-एक पार्षद हैं। दो निर्दलीय भी चुनाव जीतकर आए हैं।

चंद्रपुर का यह चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित असर की ओर इशारा कर रहा है। कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया है, जबकि बीजेपी इसे रणनीतिक जीत मान रही है।