मुंबई महानगरपालिका (BMC) भले ही मानसून से पहले नालों की 60 से 70 प्रतिशत सफाई पूरी होने का दावा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। मुंबई के कई इलाकों में नाले अब भी कचरे, प्लास्टिक और केमिकल वेस्ट से भरे पड़े हैं।
मानसून नजदीक है और ऐसे में नालों की खराब स्थिति लोगों की चिंता बढ़ा रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर साल सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही शहर में जलभराव और गंदगी की समस्या सामने आ जाती है।
कई जगहों पर नालों में जमा कचरा साफ दिखाई दे रहा है, जिससे भारी बारिश के दौरान पानी निकासी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि सफाई कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मुंबई वास्तव में मानसून के लिए तैयार है, या फिर हर साल की तरह इस बार भी शहर को जलभराव और गंदगी की समस्या का सामना करना पड़ेगा।