महाराष्ट्र में कौशल विकास के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य की महत्वाकांक्षी ‘महादृष्टि’ परियोजना को केंद्रीय वित्त मंत्रालय की जांच समिति ने मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के साथ ही एशियन डेवलपमेंट बैंक से लगभग चार हजार करोड़ रुपये के वित्तीय सहयोग का रास्ता साफ हो गया है।

कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा ने इस उपलब्धि को राज्य के युवाओं और समाज के कमजोर वर्गों के लिए ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के जरिए महाराष्ट्र कौशल विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा और ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों के युवाओं को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्री लोढ़ा ने बताया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में राज्य सरकार युवाओं को रोजगार योग्य बनाने और उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। ‘महादृष्टि’ परियोजना के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण भवनों के पुनर्निर्माण और अत्याधुनिक मशीनरी की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस परियोजना में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान भी किए जाएंगे, जिससे महिला सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी। उद्योगों की मांग के अनुरूप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे, ताकि युवाओं को देश और विदेश दोनों स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें।

राज्य सरकार के अनुसार, महाराष्ट्र आर्थिक विकास परिषद की सिफारिशों के आधार पर एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
बताया जा रहा है कि ‘महादृष्टि’ परियोजना को ‘दक्ष’ परियोजना और पीएम सेतु योजना के साथ समन्वयित किया जाएगा, ताकि उपलब्ध निधि का अधिकतम और सुनियोजित उपयोग हो सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में कौशल विकास पर दिए जा रहे विशेष जोर का उल्लेख करते हुए मंत्री लोढ़ा ने कहा कि महाराष्ट्र ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
कुल मिलाकर, ‘महादृष्टि’ परियोजना से राज्य के कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को गति मिलेगी, रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा और समाज के कमजोर वर्गों को भी मुख्यधारा से जोड़ने का अवसर प्राप्त होगा।