महिला आरक्षण के मुद्दे पर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार को सीधी चुनौती देते हुए खुली बहस की मांग की है। कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य और सांसद प्रणिती शिंदे ने साफ कहा है कि पार्टी महिला आरक्षण पर खुली चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, मुख्यमंत्री बताएं कि कब और कहां यह बहस करनी है, और इस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी शामिल किया जाए।

मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रणिती शिंदे ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर असल में मतदाता क्षेत्र पुनर्रचना का एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा था। उनका कहना है कि यह कदम देश को क्षेत्रीय आधार पर बांटने की साजिश का हिस्सा था, जिसे विपक्ष ने मिलकर विफल कर दिया।
वहीं, सांसद शोभा बच्छाव ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही पारित हो चुका है, लेकिन केंद्र सरकार ने इसमें जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें जोड़कर इसे लागू करने में देरी की। कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी दावा किया कि भाजपा इस मुद्दे का इस्तेमाल चुनावी लाभ के लिए कर रही है, खासकर उन राज्यों में जहां चुनावी माहौल गर्म है। उन्होंने कहा कि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले यह कानून लागू किया जाता, तो संसद में करीब 180 महिला सांसद दिखाई देतीं।
इसके अलावा, कांग्रेस ने भाजपा पर महिलाओं के मुद्दों को लेकर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। देवेंद्र फडणवीस के बयान पर पलटवार करते हुए प्रणिती शिंदे ने कहा कि देश में महिलाओं के खिलाफ कई गंभीर घटनाएं भाजपा शासन में हुई हैं, जिनसे सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठते हैं।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ नीति नहीं, बल्कि सियासी टकराव का बड़ा केंद्र बन गया है, जहां आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता के सामने असली सवाल यह है कि महिलाओं को उनका हक कब और कैसे मिलेगा।