मुंबई के वर्ली में आयोजित ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ में महिला आरक्षण को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंच से साफ चेतावनी दी कि जब तक संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वालों का “संविधान विरोधी चेहरा” सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक बिल नहीं, बल्कि देश की नारी शक्ति के अधिकारों की लड़ाई है, और अब महिलाएं खुद मैदान में उतरने को तैयार हैं।

सम्मेलन में हजारों महिलाओं की मौजूदगी रही, जिन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए विपक्ष के खिलाफ आक्रोश जताया। इस दौरान Rahul Gandhi और महाविकास आघाड़ी के नेताओं पर भी निशाना साधा गया। फडणवीस ने कहा कि 1996 से महिला आरक्षण की बात होती रही, लेकिन इसे आगे बढ़ाने में विपक्ष की नीतियां हमेशा बाधा बनीं। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 33% आरक्षण लागू करने का ऐतिहासिक कदम उठाया।
सीएम ने यह भी कहा कि अगर नारी शक्ति पूरी तरह जागरूक हो गई, तो कई राजनीतिक दलों की “दुकानदारी बंद हो जाएगी”, यही कारण है कि विपक्ष इस विधेयक का विरोध करता रहा है। उन्होंने महिलाओं से बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने और एक करोड़ हस्ताक्षर अभियान शुरू करने की अपील की।
वहीं भाजपा महिला प्रदेश अध्यक्ष Chitra Wagh ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विरोध कर विपक्ष ने महिलाओं के सपनों को तोड़ा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिलाएं सिर्फ वोट बैंक के लिए हैं या उन्हें वास्तविक अधिकार भी मिलेंगे।
कुल मिलाकर, मुंबई से उठी यह आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण की बहस को और तेज करने वाली है।