Home ट्रेंडिंगनासिक सिंहस्थ कुंभ के मूल स्थान को लेकर विवाद तेज, कावनई की कपिलधारा या त्र्यंबकेश्वर? साधु-संतों में मतभेद

नासिक सिंहस्थ कुंभ के मूल स्थान को लेकर विवाद तेज, कावनई की कपिलधारा या त्र्यंबकेश्वर? साधु-संतों में मतभेद

by Kalpana Pandey
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महाराष्ट्र के नासिक जिले में आगामी सिंहस्थ कुंभ को लेकर एक बार फिर मूल स्थान को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। साधु-संतों के एक वर्ग का दावा है कि सिंहस्थ कुंभ का वास्तविक और ऐतिहासिक मूल स्थान नासिक-त्र्यंबकेश्वर नहीं, बल्कि घोटी के निकट स्थित कावनई की कपिलधारा है।

श्री क्षेत्र कपिलधारा तीर्थ स्वर्ग आश्रम, कावनई के महंत रामनारायण दास फलाहारी बाबा का कहना है कि कई धार्मिक ग्रंथों, ऐतिहासिक अभिलेखों, पेशवा काल और मुगल काल के दस्तावेजों में कपिलधारा का उल्लेख सिंहस्थ कुंभ के प्रमुख स्थल के रूप में मिलता है। उनका दावा है कि अमृत की बूंदें कपिलधारा कुंड में गिरी थीं और पूर्व काल में शाही स्नान भी यहीं आयोजित होता था।

महंत रामनारायण दास का आरोप है कि बाद में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सिंहस्थ कुंभ के प्रमुख आयोजन और शाही स्नान को त्र्यंबकेश्वर और नासिक की ओर स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने इसे हिंदू धार्मिक परंपराओं और आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि पिछले लगभग 70 वर्षों से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष जारी है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार, कुंभ मंत्री, मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री स्तर तक अपनी मांग रखी जा चुकी है। वहीं यह मामला अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है और मुंबई हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इसकी सुनवाई को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि सिंहस्थ कुंभ के आधिकारिक आयोजन स्थल के संबंध में अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक और धार्मिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आता है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इस विवाद पर क्या निर्णय सामने आता है।

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