
उत्तर प्रदेश के Farrukhabad में एक अनोखा घर इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दूर से देखने पर यह मकान किसी रेलवे ट्रेन के डिब्बे जैसा दिखाई देता है। पहली नजर में लोगों को ऐसा लगता है मानो कोई रेलगाड़ी खड़ी हो, लेकिन पास जाकर पता चलता है कि यह एक आवासीय मकान है।
इस अनोखे घर के मालिक अश्वनी कुमार हैं, जिन्हें बचपन से रेलवे और ट्रेनों से विशेष लगाव रहा है। अपने इसी जुनून को उन्होंने अपने घर की डिजाइन में उतार दिया। घर के बाहरी हिस्से पर “कानपुर से कासगंज” और “कासगंज से कानपुर” लिखा गया है, जिससे यह बिल्कुल रेलवे कोच जैसा नजर आता है।
घर की खिड़कियां भी रेलवे डिब्बों की तर्ज पर स्लाइडिंग शैली में बनाई गई हैं। इसकी बनावट और रंग-रूप देखने वालों को कुछ पल के लिए हैरान कर देते हैं।
अश्वनी कुमार बताते हैं कि ट्रेन की सीटी, पटरियों की आवाज और रेल यात्राओं की यादें हमेशा उनके दिल के करीब रही हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने सपनों के घर को ट्रेन का रूप देने का फैसला किया।
उन्होंने बताया कि जब छोटी लाइन की ट्रेनों के डिब्बे लाल रंग के होते थे, तब उन्होंने अपने घर को भी लाल रंग से रंगवाया था। बाद में जब ब्रॉड गेज ट्रेनों के डिब्बों का रंग नीला हुआ, तो उन्होंने अपने घर के दरवाजों और अन्य हिस्सों में भी उसी शैली का रंग प्रयोग किया।
अनोखी डिजाइन और रेलवे थीम की वजह से यह घर अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जो भी इस घर को देखता है, वह कुछ देर रुककर इसकी तस्वीरें लेने और इसके बारे में जानने की कोशिश जरूर करता है।उत्तर प्रदेश के Farrukhabad में एक अनोखा घर इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। दूर से देखने पर यह मकान किसी रेलवे ट्रेन के डिब्बे जैसा दिखाई देता है। पहली नजर में लोगों को ऐसा लगता है मानो कोई रेलगाड़ी खड़ी हो, लेकिन पास जाकर पता चलता है कि यह एक आवासीय मकान है।
इस अनोखे घर के मालिक अश्वनी कुमार हैं, जिन्हें बचपन से रेलवे और ट्रेनों से विशेष लगाव रहा है। अपने इसी जुनून को उन्होंने अपने घर की डिजाइन में उतार दिया। घर के बाहरी हिस्से पर “कानपुर से कासगंज” और “कासगंज से कानपुर” लिखा गया है, जिससे यह बिल्कुल रेलवे कोच जैसा नजर आता है।
घर की खिड़कियां भी रेलवे डिब्बों की तर्ज पर स्लाइडिंग शैली में बनाई गई हैं। इसकी बनावट और रंग-रूप देखने वालों को कुछ पल के लिए हैरान कर देते हैं।
अश्वनी कुमार बताते हैं कि ट्रेन की सीटी, पटरियों की आवाज और रेल यात्राओं की यादें हमेशा उनके दिल के करीब रही हैं। यही वजह है कि उन्होंने अपने सपनों के घर को ट्रेन का रूप देने का फैसला किया।
उन्होंने बताया कि जब छोटी लाइन की ट्रेनों के डिब्बे लाल रंग के होते थे, तब उन्होंने अपने घर को भी लाल रंग से रंगवाया था। बाद में जब ब्रॉड गेज ट्रेनों के डिब्बों का रंग नीला हुआ, तो उन्होंने अपने घर के दरवाजों और अन्य हिस्सों में भी उसी शैली का रंग प्रयोग किया।
अनोखी डिजाइन और रेलवे थीम की वजह से यह घर अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जो भी इस घर को देखता है, वह कुछ देर रुककर इसकी तस्वीरें लेने और इसके बारे में जानने की कोशिश जरूर करता है।