अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े सैन्य हमले के बाद अब इसका राजनीतिक असर अमेरिका के भीतर भी दिखाई देने लगा है। हमलों के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो संदेश जारी कर ईरानी जनता से अपील की कि वे अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लें और 1979 से शासन कर रहे इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ खड़े हों।
बताया जा रहा है कि हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालयों के आसपास के इलाकों समेत कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस कदम का अमेरिका के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है। देश की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका को ऐसी जंग में धकेला जा रहा है, जिसे देश की जनता नहीं चाहती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे ईरान में सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से किसी भी युद्ध का विरोध करती हैं और अमेरिकी सैनिकों को एक अनावश्यक संघर्ष में झोंकना बेहद खतरनाक है।
हैरिस ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने युद्ध खत्म करने का वादा किया था, लेकिन अब वे एक नए संघर्ष की शुरुआत कर रहे हैं। उनके मुताबिक, यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक स्तर पर अमेरिका की साख दोनों के लिए जोखिम भरा है।
वहीं, न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने भी इस सैन्य कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने इसे एक आक्रामक युद्ध की दिशा में खतरनाक कदम बताते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिक एक और युद्ध नहीं चाहते। ममदानी ने शांति की अपील करते हुए कहा कि उनका ध्यान न्यूयॉर्क के हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।

ईरान पर हमले को लेकर अमेरिका में अब सियासी बहस तेज हो गई है। एक ओर ट्रंप प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्षी नेता इसे जल्दबाजी और जोखिम भरा निर्णय करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।