नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह निर्णय नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में लिया गया।
केंद्र के इस फैसले का स्वागत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने किया है। पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि यह केरल के लोगों की लंबे समय से चली आ रही लोकतांत्रिक मांग का सम्मान है और राज्य की भाषाई विरासत तथा सामूहिक स्वाभिमान को मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हालांकि, इस फैसले के बाद सियासी बहस भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार द्वारा राज्य का आधिकारिक नाम ‘बांग्ला’ करने के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर अब तक कोई विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पश्चिम बंगाल के मामले में चुप्पी साध रखी है, जबकि केरल के प्रस्ताव को तेजी से मंजूरी दे दी गई।
ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि केरल में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक समीकरण के कारण यह निर्णय संभव हो पाया। उनके इस बयान के बाद नाम बदलने के मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच नए सिरे से राजनीतिक टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

अब सवाल यह है कि क्या ‘बांग्ला’ नाम के प्रस्ताव पर भी केंद्र जल्द कोई निर्णय लेगा या यह मुद्दा सियासी बहस का हिस्सा बना रहेगा। फिलहाल ‘केरलम’ को मिली मंजूरी ने राष्ट्रीय राजनीति में नाम परिवर्तन के मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।