मराठी भाषा गौरव दिवस के मौके पर महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना के उबाठा गुट और सांसद संजय राउत पर तीखा हमला बोला है।
मुंबई स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि मराठी भाषा का ‘जय-जयकार’ करना और दूसरी ओर स्कूलों में पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य करने जैसे फैसलों का समर्थन करना यह दोहरा चरित्र है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा का अपमान करने वालों को आज भाषा प्रेम का ढोंग करने का कोई अधिकार नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रयासों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा और सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि त्रिभाषा सूत्र में मराठी को कहीं भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि पहली कक्षा से हिंदी की अनिवार्यता हटाकर महाराष्ट्र में मराठी को अनिवार्य किया गया और हिंदी को वैकल्पिक भाषा के रूप में रखा गया है।
नवनाथ बन ने यह भी सवाल उठाया कि उबाठा गुट ने मराठी भाषा के लिए आखिर ठोस रूप से क्या किया है? उन्होंने कहा कि अंग्रेजी और हिंदी को पहली कक्षा से अनिवार्य करने की सिफारिश उद्धव ठाकरे की मंत्रिमंडल ने ही स्वीकार की थी। यदि साहस है तो संजय राउत को इस विषय पर उद्धव ठाकरे से जवाब मांगना चाहिए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महानगरपालिका में महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान भाषा नहीं, बल्कि ‘मनी-मनी’ की भाषा समझी जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई महानगरपालिका में ठेकेदारों की भाषा मराठी थी या पैसों की इस पर राउत को जवाब देना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने संदीप देशपांडे के पहले दिए गए बयान का भी हवाला दिया।

वहीं, अजित पवार से जुड़े विमान दुर्घटना मामले पर भी भाजपा प्रवक्ता ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीआईडी पहले ही जांच की स्थिति स्पष्ट कर चुकी है, ऐसे में विरासत की राजनीति करने वाले नेताओं को अनावश्यक संदेह खड़ा करना बंद करना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने रोहित पवार पर भी निशाना साधा।
मराठी भाषा दिवस के अवसर पर शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, क्योंकि भाषा और अस्मिता का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा संवेदनशील और प्रभावशाली रहा है।