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मराठी को रोजगार और वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प, विधानमंडल में गूंजा गौरव दिवस

by Suhani Sharma
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मुंबई:मराठी भाषा गौरव दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र विधानमंडल में आयोजित ‘जावे विनोदाच्या गावा’ कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठी भाषा को रोजगार, अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मराठी केवल संस्कृति की भाषा नहीं, बल्कि अवसर और अर्थकारण की भी भाषा बने यह सरकार का लक्ष्य है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्राताई पवार, विधान परिषद सभापति राम शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरे सहित कई मंत्री और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजन का संयोजन केदार शिंदे, ऋषिकेश जोशी, प्रभु देसाई, धनश्री दामले और उनकी टीम ने किया।

अपने संबोधन में शिंदे ने कहा कि मराठी हजारों वर्षों की सांस्कृतिक परंपरा को संजोए हुए है और राज्य की नसा-नस में बहती है। “लाभले आम्हांस भाग्य बोलतो मराठी” पंक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कविश्रेष्ठ कुसुमाग्रज को नमन किया तथा संत, साहित्यकार, शिक्षक और शोधकर्ताओं के योगदान को याद किया…
उन्होंने कहा कि मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाने के लिए राज्य सरकार ने निरंतर प्रयास किए और इस दिशा में केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रशासनिक कार्यों में मराठी के उपयोग को अनिवार्य रूप से बढ़ाने पर भी उन्होंने जोर दिया।

शिंदे ने बताया कि सरकार विश्वकोश की नोंदियों को अद्यतन करने, बालकोश और कुमार कोश जैसे उपक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी तक मराठी पहुंचाने और विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराने के प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि मराठी साहित्य का अन्य भाषाओं में अनुवाद कर वैश्विक स्तर पर उसकी पहचान मजबूत की जाएगी..
तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में मराठी की नई अभिव्यक्तियों का स्वागत करते हुए उन्होंने खानदेशी, मालवणी, कोकणी और वऱ्हाडी जैसी बोलियों का उल्लेख किया और कहा कि यही विविधता मराठी की असली ताकत है।
कार्यक्रम में मराठी विनोद परंपरा का भी विशेष उल्लेख हुआ। शिंदे ने आचार्य अत्रे और पु. ल. देशपांडे की शैली को याद करते हुए कहा कि संकट में भी हास्य खोज लेना मराठी समाज की विशेषता है।

अपने भावुक संबोधन में उन्होंने कहा, “मेरे खून में मराठी है, मेरी सांसों में मराठी है।” साथ ही सभी नागरिकों से आह्वान किया कि मराठी भाषा के संवर्धन और उसके वैश्विक विस्तार के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं, ताकि मराठी का परचम सात समंदर पार भी लहराता रहे।

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