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मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला का सरेंडर? अमेरिका को 50 मिलियन बैरल तेल, कमाई पर ट्रंप का सीधा कंट्रोल

by Real Khabren
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मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला

वॉशिंगटन : दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार रखने वाला देश है वेनेजुएला,और आज वही देश अमेरिका की शर्तों पर झुकता हुआ दिखाई दे रहा है।

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सनसनीखेज गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा ऐलान किया है जिसने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाज़ार दोनों में भूचाल ला दिया है।

ट्रंप ने दावा किया है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल हाई क्वालिटी कच्चा तेल देगी।
यह तेल स्टोरेज शिप से सीधे अमेरिकी अनलोडिंग डॉक तक लाया जाएगा और बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा।

सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा यही है इस तेल की बिक्री से होने वाली पूरी कमाई
अमेरिका के राष्ट्रपति के कंट्रोल में रहेगी।
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इन पैसों का इस्तेमाल अमेरिका और वेनेजुएला दोनों देशों के नागरिकों के फायदे के लिए किया जाएगा।

ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को इस प्लान को तुरंत लागू करने के निर्देश दे दिए हैं।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा हालात में जब कच्चे तेल की कीमत करीब 56 डॉलर प्रति बैरल है,तो इस पूरी खेप की अनुमानित कीमत
करीब 2.8 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

हालांकि यह सप्लाई अमेरिका की महज़ ढाई दिन की जरूरत के बराबर है,लेकिन इसका राजनीतिक संदेश कहीं ज़्यादा बड़ा माना जा रहा है।

गौरतलब है कि 3 जनवरी को अमेरिकी सेनाओं ने एक गुप्त ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया था।

दोनों को न्यूयॉर्क लाया गया, जहां मैनहट्टन कोर्ट में मादुरो पर ड्रग और हथियारों की तस्करी के गंभीर आरोपों में मुकदमा चल रहा है।
हालांकि मादुरो ने अदालत में खुद को निर्दोष बताते हुए इस कार्रवाई को अपहरण करार दिया है।

ट्रंप प्रशासन मादुरो की गिरफ्तारी को वेनेजुएला के लिए एक “टर्निंग पॉइंट” के तौर पर पेश कर रहा है।

इसी कड़ी में व्हाइट हाउस में तेल कंपनियों के बड़े अधिकारियों के साथ
एक अहम बैठक भी तय मानी जा रही है,जिसमें एक्सॉन, शेवरॉन और कोनोकोफिलिप्स जैसी दिग्गज कंपनियों के शामिल होने की संभावना है।

सवाल यही है..क्या मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला वास्तव में अमेरिका के सामने झुक चुका है?
और क्या यह तेल डील
वैश्विक ताकत के संतुलन को बदलने वाली साबित होगी?

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