लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और जलवायु एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत और स्वास्थ्य को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को तीखी बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने जब यह दलील दी कि वांगचुक को लद्दाख की तुलना में जयपुर में बेहतर इलाज मिल रहा है, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया कि सोनम वांगचुक की हालत “बिल्कुल ठीक” है और उन्हें एम्स जोधपुर में सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। एएसजी के.एम. नटराज ने अदालत को यह भी बताया कि वांगचुक की हिरासत की समीक्षा को लेकर अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अरविंद कुमार ने सवाल उठाया कि अदालत के निर्देश के बावजूद हिरासत की समीक्षा में अब तक क्या कदम उठाए गए। इस पर एएसजी ने स्वीकार किया कि अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
वहीं, सोनम वांगचुक की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनकी तबीयत अब भी पूरी तरह ठीक नहीं है और ऐसे में उनकी हिरासत पर पुनर्विचार किया जाना जरूरी है। जस्टिस पी.बी. वराले ने भी माना कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं मौजूद हैं और डॉक्टरों ने इलाज की आवश्यकता को स्वीकार किया है।

जब एएसजी ने कहा कि “इलाज के लिए जयपुर, लद्दाख से बेहतर जगह है”, तो इस पर जस्टिस वराले ने तुरंत आपत्ति जताते हुए कहा—“नहीं, नहीं, आप ऐसा नहीं कह सकते।” अदालत की इस टिप्पणी को केंद्र सरकार की दलील पर सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 के तहत की गई वांगचुक की हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग की गई है। कोर्ट ने साफ किया कि आगे किसी भी तरह का स्थगन नहीं दिया जाएगा।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। उन पर लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने का आरोप है। फिलहाल वे जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं।