Home mumbaiसुप्रिया सुले का बड़ा हमला: अल्पसंख्यक दर्जा विवाद से महाराष्ट्र की छवि खराब, CM देवेंद्र फडणवीस से मांगा जवाब

सुप्रिया सुले का बड़ा हमला: अल्पसंख्यक दर्जा विवाद से महाराष्ट्र की छवि खराब, CM देवेंद्र फडणवीस से मांगा जवाब

by Suhani Sharma
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नई दिल्ली :राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्षा और सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने के विवाद और मंत्रालय में हुई कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण से महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस और प्रशासन की देशभर में एक अच्छी पहचान रही है, लेकिन दुखवटा काल के दौरान शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा देने का मामला सामने आने से राज्य की बदनामी हो रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और इस पूरे मामले पर स्पष्ट बयान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है कि मंत्रालय में दुखवटा होने के बावजूद ऐसे फैसले लिए गए। उन्होंने मीडिया की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि इस मुद्दे को उजागर करने का श्रेय मीडिया को जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की कि वह इस पूरे मामले की सच्चाई सामने रखें।

ACB की कार्रवाई और मंत्रालय में मंत्री के कार्यालय पर छापे को लेकर भी सुप्रिया सुळे ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ACB सीधे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करती है, ऐसे में मंत्रालय के अंदर ही मंत्री के कार्यालय पर छापा पड़ना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस कार्रवाई की जानकारी किसने दी और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।

पार्थ पवार से जुड़े कथित जमीन घोटाले के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मामला फिलहाल अदालत में है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि देश में न्यायालय के फैसले का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है।
पार्थ पवार के मामले में उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चाई सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए।

सुप्रिया सुळे ने कहा कि वह मंत्री नरहरी झिरवळ को लंबे समय से जानती हैं और उनके खिलाफ लगे आरोपों की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी जब छगन भुजबळ और नवाब मलिक मुश्किल में थे, तब वह उनके साथ खड़ी थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी मामले में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता जरूरी है।

सुप्रिया सुळे ने अंत में कहा कि मुख्यमंत्री पूरे राज्य के प्रमुख होते हैं, सिर्फ किसी एक पार्टी के नहीं। इसलिए इस मामले में उनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होनी चाहिए, ताकि महाराष्ट्र की छवि और जनता का विश्वास बरकरार रहे।

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