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रामदास आठवले की राज्यसभा में हैट्रिक, तीसरी बार बनेंगे सांसद

by Suhani Sharma
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मुंबई से बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री Ramdas Athawale ने महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है। माना जा रहा है कि इस बार भी वे निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने जाएंगे। इसके साथ ही आठवले लगातार तीसरी बार राज्यसभा सांसद बनने की हैट्रिक पूरी करने जा रहे हैं।
महाराष्ट्र से इस बार राज्यसभा की सात सीटों पर चुनाव होना है और सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना जताई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के प्रमुख रामदास आठवले को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया गया है। इससे पहले वे 2014 और 2020 में भी राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं और अब 2026 में तीसरी बार सदन में पहुंचने जा रहे हैं।


नामांकन दाखिल करने के बाद रामदास आठवले मुंबई के दादर स्थित Chaitya Bhoomi पहुंचे और वहां भारत रत्न B. R. Ambedkar को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनकी पत्नी सीमा आठवले, पुत्र जीत आठवले और रिपब्लिकन पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
रामदास आठवले केंद्र की Narendra Modi सरकार में जुलाई 2016 से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके बाद 2019 और 2024 में भी उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली। इस तरह वे लगातार तीन बार केंद्रीय राज्य मंत्री बनने का रिकॉर्ड भी बना चुके हैं।


राजनीतिक सफर की बात करें तो रामदास आठवले मूल रूप से महाराष्ट्र के सांगली जिले के कवठेमहांकाल क्षेत्र से आते हैं। मुंबई आने के बाद उन्होंने दलित आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और Dalit Panthers आंदोलन से जुड़े। बाद में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेतृत्व में सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष को आगे बढ़ाया।
आठवले 1998 में दक्षिण मध्य मुंबई से पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1999 और 2004 में पंढरपुर लोकसभा सीट से भी जीत हासिल की। 2014 में उन्हें भाजपा के सहयोग से पहली बार राज्यसभा भेजा गया और तब से वे लगातार संसद के उच्च सदन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
अब तीसरी बार राज्यसभा पहुंचने के साथ ही रामदास आठवले न केवल सांसद के रूप में हैट्रिक पूरी करने जा रहे हैं, बल्कि केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी उनकी लगातार मौजूदगी ने उन्हें दलित और बहुजन राजनीति का एक प्रमुख चेहरा बना दिया है।

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