
Reserve Bank of India की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में चालू खाता अधिशेष (Current Account Surplus) दर्ज होने के बावजूद अप्रैल माह में भुगतान संतुलन (Balance of Payments) घाटे में रहा। यह संकेत देता है कि विदेशी मुद्रा प्रवाह और बाहरी लेन-देन के कुछ अन्य घटकों का समग्र प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात, आयात तथा पूंजी प्रवाह से जुड़े आंकड़ों में बदलाव के कारण भुगतान संतुलन पर दबाव देखने को मिला। हालांकि चालू खाते की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बाहरी क्षेत्र को प्रभावित कर रहे हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और विदेशी मुद्रा भंडार देश को ऐसे अस्थायी दबावों से निपटने में सक्षम बनाते हैं। आने वाले महीनों में वैश्विक व्यापार, निवेश प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों का रुख भुगतान संतुलन की स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।