मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने पहली बार साफ कर दिया है कि वह किन शर्तों पर अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष खत्म करने को तैयार है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि जब तक ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाता, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जाती और भविष्य में हमलों के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी नहीं मिलती, तब तक जंग खत्म नहीं हो सकती।
पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान में कहा कि क्षेत्र में शांति कायम करने के लिए इन तीनों शर्तों को मानना जरूरी है। उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान क्षेत्र में स्थिरता चाहता है, लेकिन इसके लिए जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराना भी जरूरी है।

दरअसल यह संघर्ष तब शुरू हुआ जब United States और Israel ने 28 फरवरी को ईरान के ठिकानों पर संयुक्त एहतियाती हमला किया। इसके जवाब में Iran ने ड्रोन और मिसाइलों से इजरायल के कई शहरों को निशाना बनाया और साथ ही जॉर्डन, इराक और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए। इसके बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव तेजी से बढ़ गया।
इस युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। खास तौर पर Strait of Hormuz में बढ़ते सैन्य तनाव और सुरक्षा खतरे की वजह से तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है और दुनिया भर में महंगाई का खतरा भी गहरा सकता है।

फिलहाल युद्ध दूसरे हफ्ते में पहुंच चुका है और दोनों पक्षों की ओर से हमले जारी हैं। ऐसे में ईरान की ओर से रखी गई ये शर्तें आने वाले समय में किसी संभावित कूटनीतिक समाधान की दिशा तय कर सकती हैं, लेकिन मौजूदा हालात में तनाव कम होने के संकेत अभी दिखाई नहीं दे रहे हैं।