पुणे: महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी एमपीएससी ने ग्रुप-ब संयुक्त पूर्व परीक्षा 2026 की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 552 पदों की घोषणा की गई है। इसमें PSI, STI और ASO जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। यह परीक्षा 14 जून 2026 को आयोजित की जाएगी, जबकि आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चलेगी।

लेकिन इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस अधिसूचना में अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग के लिए एक भी पद आरक्षित नहीं किया गया है। इस खुलासे के बाद छात्रों में भारी नाराज़गी और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
इस मुद्दे पर वंचित बहुजन आघाड़ी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन का कहना है कि अगर आधिकारिक विज्ञापन में आरक्षण का उचित हिस्सा नहीं दिया गया है, तो इसे केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं माना जा सकता। यह सामाजिक न्याय के मूलभूत सिद्धांतों पर सीधा हमला है।
आघाड़ी ने आगे कहा है कि वर्षों से मेहनत कर रहे छात्रों को इस तरह की स्थिति में डालना बेहद गैर-जिम्मेदाराना है। आरक्षण संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और इसमें किसी भी प्रकार की समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
संगठन ने सरकार और एमपीएससी से तत्काल स्पष्टीकरण देने की मांग की है। साथ ही आरक्षण का पूरा विवरण सार्वजनिक करने और छात्रों का भ्रम दूर करने की अपील की गई है।
इसके अलावा, संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है। साथ ही PSI पदों के लिए आयु सीमा बढ़ाने की भी मांग की गई है।
फिलहाल इस मामले को लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।