
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर साफ नजर आ रहा है। पिंपळखुटी से यवतमाल तक करीब 100 किलोमीटर का लंबा पैदल मार्च कर रहे सैकड़ों किसान भीषण गर्मी के बावजूद अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। 19 अप्रैल से शुरू हुआ यह लॉन्ग मार्च आज यवतमाल जिला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचने वाला है, जहां किसान प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करेंगे।
इस मार्च की खास बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में महिला किसान भी शामिल हैं, जो 45 डिग्री तक पहुंच चुके तापमान में लगातार पैदल चल रही हैं। किसान सभा और सीटू के नेतृत्व में निकाले जा रहे इस मार्च में श्रमिक वर्ग भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है।
प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रही है और मुख्यधारा का मीडिया भी इस बड़े आंदोलन को पर्याप्त कवरेज नहीं दे रहा। किसानों की प्रमुख मांगों में वन भूमि पर अधिकार, फसलों के उचित दाम और श्रमिकों के लिए न्यायपूर्ण अधिकार शामिल हैं।
लंबी और कठिन यात्रा के बावजूद किसानों का हौसला मजबूत बना हुआ है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। विदर्भ का यह लॉन्ग मार्च अब सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।