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अंबरनाथ में ‘खेला’: कांग्रेस के 12 पार्षद बीजेपी में शामिल, गठबंधन टूटते ही पलटी सियासत

by Real Khabren
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अंबरनाथ में ‘खेला’: कांग्रेस के 12

मुंबई समेत महाराष्ट्र में महानगर पालिका चुनाव से पहले विपक्ष को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। मुंबई से सटे अंबरनाथ की राजनीति में ऐसा उलटफेर हुआ है, जिसने पूरे सियासी समीकरण को हिला कर रख दिया है। जिस कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को अपना सबसे बड़ा सियासी विरोधी बताया था, उसी कांग्रेस के 12 नवनिर्वाचित पार्षद अब बीजेपी की कतार में खड़े नजर आ रहे हैं।

दरअसल, 20 दिसंबर को हुए अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत का आंकड़ा छूने से चूक गई। इसके बाद राजनीति में चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब बीजेपी ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ का गठन किया। यह गठबंधन न सिर्फ कार्यकर्ताओं के लिए बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी अप्रत्याशित था।

हालांकि, यह गठबंधन ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया। कांग्रेस हाईकमान ने बीजेपी के साथ हाथ मिलाने को पार्टी लाइन के खिलाफ मानते हुए अपने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया। इसके बाद सियासत ने एक और करवट ली। बुधवार देर रात वही 12 निलंबित पार्षद औपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गए।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये पार्षद सरकार की कार्यशैली और विकास के वादों से प्रभावित होकर बीजेपी में आए हैं। उनका दावा है कि विकास के मुद्दे को प्राथमिकता देते हुए इन पार्षदों ने पार्टी परिवर्तन का फैसला किया है। एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन के साथ अब बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन न सिर्फ बहुमत के आंकड़े तक पहुंच गया है, बल्कि उससे आगे भी निकल चुका है।

इस पूरे घटनाक्रम ने अंबरनाथ की राजनीति में सियासी भूचाल ला दिया है। सवाल अब यही है कि क्या यह बदलाव वाकई सिर्फ विकास की राजनीति का नतीजा है, या फिर अंबरनाथ में सत्ता की सियासत ने एक बार फिर विचारधाराओं की सीमाओं को तोड़ दिया है? आने वाले दिनों में इसका असर न सिर्फ स्थानीय राजनीति पर, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के महानगर पालिका चुनावी माहौल पर भी साफ दिखाई दे सकता है।

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