Home क्राइमईरान युद्ध में इजरायल का आयरन बीम घिरा सवालों में, क्या लेजर डिफेंस सिस्टम उम्मीदों पर खरा उतर पा रहा है?

ईरान युद्ध में इजरायल का आयरन बीम घिरा सवालों में, क्या लेजर डिफेंस सिस्टम उम्मीदों पर खरा उतर पा रहा है?

by Suhani Sharma
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तेल अवीव। ईरान और उसके समर्थित संगठनों के साथ जारी तनाव के बीच इजरायल ने अपने हाई-टेक लेजर एयर डिफेंस सिस्टम Iron Beam को सक्रिय कर दिया है। इसे रॉकेट और ड्रोन स्वार्म हमलों के खिलाफ गेमचेंजर माना जा रहा था, लेकिन युद्ध के मैदान से सामने आ रही जानकारी ने इसकी सीमाओं को भी उजागर कर दिया है।
इजरायली डिफेंस फोर्स ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर दावा किया कि आयरन बीम ने लेबनान की दिशा से दागे गए रॉकेट को लेजर किरणों से हवा में ही नष्ट कर दिया। हाई-एनर्जी लेजर की लगातार किरणों से लक्ष्य को जलाकर खत्म करने की यह तकनीक पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर की तुलना में काफी सस्ती मानी जाती है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस सिस्टम पर टिकी हुई है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि लेजर हथियारों की सबसे बड़ी सीमा उनकी रेंज है। आयरन बीम की प्रभावी रेंज लगभग 10 किलोमीटर मानी जा रही है। ऐसे में लंबी दूरी से आने वाले ड्रोन, जैसे ईरान का Shahed 136, को तभी निशाना बनाया जा सकता है जब वे काफी नजदीक आ जाएं। शाहेद-136 जैसे ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज करीब 2,000 किलोमीटर बताई जाती है, जिससे साफ है कि लेजर सिस्टम अंतिम चरण की सुरक्षा परत के रूप में ही ज्यादा कारगर हो सकता है।


एक और बड़ी चुनौती मौसम है। लेजर बीम को लक्ष्य पर कुछ सेकेंड तक लगातार टिके रहना पड़ता है। धूल, धुआं, बादल या नमी जैसे कारक बीम की ताकत को कमजोर कर सकते हैं। इसके अलावा यह सिस्टम ‘लाइन ऑफ साइट’ पर निर्भर करता है, यानी टारगेट दिखाई देना जरूरी है। पहाड़, इमारतें या अन्य अवरोध इसकी क्षमता को सीमित कर सकते हैं।
इजरायल का मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क पहले से ही Iron Dome, डेविड्स स्लिंग और एरो सिस्टम जैसे इंटरसेप्टर पर आधारित है। आयरन बीम को इसी नेटवर्क का कम दूरी वाला, कम लागत विकल्प माना जा रहा है, ताकि सस्ते ड्रोन और रॉकेट के खिलाफ महंगे मिसाइल इंटरसेप्टर का इस्तेमाल कम किया जा सके।


रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भविष्य में लेजर सिस्टम को जमीन के साथ-साथ हवा में भी तैनात किया जा सकता है जैसे ड्रोन या विमान पर माउंटेड लेजर। इससे रेंज और प्रतिक्रिया समय दोनों में सुधार संभव है।
फिलहाल, आयरन बीम तकनीकी रूप से प्रभावी जरूर दिख रहा है, लेकिन इसकी सीमाएं भी साफ हैं। युद्ध के मौजूदा हालात ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लेजर हथियार पारंपरिक एयर डिफेंस का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक प्रणाली हैं। आने वाले समय में यह तकनीक कितनी विकसित होती है और वास्तविक युद्ध स्थितियों में कितना भरोसेमंद साबित होती है इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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