मुंबई : वंचित बहुजन आघाडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी बाहरी दबाव में आकर अपना रुख तय नहीं करना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रकाश आंबेडकर ने रमजान के पवित्र महीने में ईरान पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई का संदेश पूरे मुस्लिम जगत में नकारात्मक जाएगा और इससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ेगी। उनके मुताबिक, क्षेत्र में तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।

उन्होंने भारत-ईरान संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्ते रहे हैं। ईरान लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ता रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या भारत अपने तेल व्यापार को जारी रखेगा या अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौतों के दबाव में अपनी नीति बदलेगा?
आंबेडकर ने यह भी पूछा कि यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है, तो क्या भारत सरकार अमेरिकी सेना को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देगी? उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या परोक्ष सैन्य भागीदारी भारत के लिए गंभीर आर्थिक और सुरक्षा परिणाम ला सकती है।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाए, ईरान के साथ संबंध मजबूत बनाए रखे और कूटनीतिक स्तर पर युद्ध को आगे बढ़ने से रोकने के प्रयास करे।

अंत में प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में छिड़ा यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक होगा और भारत इससे अछूता नहीं रह पाएगा।